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Chaitra Navratri Kanya Pujan |
Chaitra Navratri Kanya Pujan: कन्या पूजन के बिना नवरात्रि की पूजा अधूरी मानी जाती है। चाहें फिर वह चैत्र नवरात्रि हो या फिर शारदीय नवरात्रि और या फिर गुप्त नवरात्रि। अगर चैत्र नवरात्रि की बात करें तो कुछ लोग चैत्र नवरात्रि के आठवें दिन यानी अष्टमी तिथि के दिन कन्या पूजन करके मां दुर्गा (Goddess Durga) को विदा करते हैं तो वहीं कुछ लोग रामनवमी के दिन यानी नवमी तिथि को कन्या पूजन करके मां दुर्गा को विदा करते हैं। जो चैत्र नवरात्रि का आखिरी दिन भी होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि महानवमी पर कन्या पूजन की सही विधि क्या है, अगर नहीं तो आज हम आपको इसके बारे में बताएंगे तो बिना किसी देरी के चलिए जानते हैं महानवमी पर किस प्रकार से करें कन्या पूजन (Kanya Pujan)
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कन्या पूजन विधि (Kanya Pujan Vidhi)
1.महानवमी पर कन्या पूजन के साथ ही मां दुर्गा को विदा कर दिया जाता है। इस दिन सुबह ब्रह्ममुहूर्त में स्नान करने के बाद साफ वस्त्र धारण करके ही प्रसाद का भोजन बनाना चाहिए।
2.प्रसाद में हलुआ,चना ,पूड़ी और खीर आदि बनाएं। क्योंकि इस दिन मां दुर्गा को इन्हीं चीजों का भोग लगाया जाता है और कन्याओं को यही भोजन प्रसाद के रूप में दिया जाता है।
3.इसके बाद मां दुर्गा की विधिवत पूजा करें। जिस प्रकार से आप पूरी नवरात्रि पूजा करते आएं हैं और इसके बाद नौ जगह प्रसाद को भोजन निकाल लें और उसके बाद पहले मां दुर्गा को सभी नौ निकाले गए भोग में से थोड़ा - थोड़ा भो ग लगाएं।
4. मां दुर्गा को भोग लगाने के बाद नौ वर्ष से छोटी कन्याओं को घर भोजन के लिए आमंत्रित करें और सबसे पहले उनका पूजन करें कन्या पूजन करते समय मां दुर्गा का ध्यान अवश्य करना चाहिए और पूरी श्रद्धा के साथ कन्या पूजन करना चाहिए।
5. सबसे पहले सभी नौ कन्याओं के पैर स्वंय धोएं। इसके बाद साफ स्थान पर कपड़ा बिछाकर उन्हें बिठाएं।
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6. सभी कन्याओं को एक साथ बिठाकर उनके हाथों मे रक्षासूत्र बांधना चाहिए और उनके माथे पर रोली का तिलक करना चाहिए।
7.इसके बाद मां दुर्गा के निकाले गए नौ भोगों को सर्वप्रथम नौ कन्याओं को खिलाना चाहिए और सभी नौ कन्याओं को लाल रंग की चुनरी अर्पित करें।
8.जब सभी कन्याएं पेट भरकर भोजन कर लें तो उन्हें दक्षिणा और उपहार स्वरूप कुछ न कुछ अवश्य देना चाहिए। बिना उपहार के उन्हें घर से विदा न करें।
9.कन्याओं को उपहार देने के बाद उनके पैर छुकर उनका आशीर्वाद अवश्य लें।
10.अंत में किसी ब्राह्मण और गाय को भी भोजन अवश्य कराएं और साथ ही ब्राह्मण को दक्षिणा भी दें।
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