Gangaur Puja Vidhi |
इस दिन विवाहित स्त्रियां अपने अपने वैवाहिक जीवन और पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं और प्रार्थना करती हैं तो वहीं अविवाहित कन्याएं मनचाहा पति पाने व्रत और पूजा करती हैं। राजस्थान में गणगौर के पर्व को 16 दिनों तक तो वहीं मध्य प्रदेश में इस पर्व को 3 दिनों तक मनाया जाता है। लेकिन अगर आप यह नहीं जानती की गणगौर पूजा कैसे की जाती है तो आज हम आपको इसके बारे में बताएंगे तो बिना किसी देरी के चलिए जानते हैं गणगौर पूजा की विधि।
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गणगौर पूजा विधि (Gangaur Puja Vidhi)
1.गणगौर पूजा का व्रत रखने वाली महिला को इस दिन किसी पवित्र नदी में स्नान करने के बाद लाल रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए।
2. इसके बाद एक लकड़ी की चौकी लेकर उस पर गंगाजल छिड़कें और लाल रंग के वस्त्र बिछाएं।
3.वस्त्र बिछाने के बाद चौकी पर जल से भरा कलश स्थापित करें और उसमें गंगाजल, सुपारी, हल्दी,चावल और एक रूपए का सिक्का डालकर उसके मुंह पर रोली बांधें।
4.इसके बाद कलश को आम के पत्तों से सजाएं और एक नारियल पर मौली बांधकर कलश पर रखें।
5.नारियल रखने के बाद भगवान शिव और माता पार्वती की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें और एक घी का एक घी का दीपक तस्वीर के दाहिनी और रखें।
6.इसके बाद हाथ में फूल और सुपारी लेकर पूजा का संकल्प लें और शिव पार्वती के चरणों में अर्पित करें।
7.संकल्प लेने के बाद घी का दीपक जलाएं और मिट्टी या बेसन से बनाई हुई छह गौर चौकी पर स्थापित करें।
8.इसके बाद गौर पर हल्दी और कुमकुम का छिड़काव करें और माता गौरी को सिंदूर लगाकर अक्षत और फूल भी चढ़ाएं।
9. इसके बाद उस सिंदूर को माथे पर लगाकर ऊँ पार्वत्यै देव्यै नम: मंत्र को बोलें।
10. मंत्र उच्चारण के बाद गौर को अगबत्ती दिखाएं और इसके बाद फल और मिठाई अर्पित कर दें।
11. इसके बाद एक सफेद कागज पर 16 कुमकुम, 16 मेहंदी और 16 काजल के टीके लगाकरा माता पार्वती को अपिर्त करें।
12.कागज अर्पित करने के बाद एक कटोरी में पानी में दूध, एक रूपए का सिक्का कौड़ी और सुपारी डालकर उसे अपने हाथ में रखें और किसी अन्य व्यक्ति से गणगौर की कथा सुनें।
13.कथा के पूर्ण हो जाने के बाद इस कटोरी को गौर के सामने रखकर और माता गौरी को प्रणाम करके अपने सुहाग के लिए प्रार्थना करें।
14. अंत में गौर को चढ़ाया हुआ प्रसाद लोगों के बीच में बांट दें।
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